विश्वास ही आपका सहायक होगा।

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………जितना अधिक आप देंगे उतना ही अधिक आप पायेंगे। अपनी चैतन्य लहरियों का आप जितना अधिक उपयोग करेंगे, उतनी ही अधिक चैतन्य लहरियां पायेंगे। हमेशा दूसरों की मदद के लिए चैतन्य लहरियों का उपयोग करो। जन्तुओं तथा प्रकृति को लहरियां दो। वह अवस्था आनी है कि आप स्वयं जल चैतन्यित कर सकें। आप सब इसका समाधान कर सकते हैं और बहुत कार्य कर सकते हैं परन्तु अपने ऊपर विश्वास रखें जिससे सहायता मिले। स्वयं में विश्वास, कि आप अपनी माँ के प्रति पूर्णतया समर्पित महान सहजयोगी है, विश्वास ही आपका सहायक होगा।…….
–परमपूज्य श्रीमाताजी, श्रीलक्ष्मी पूजा, अलीबाग, १९९१–

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